शनिवार, 10 जनवरी 2009

नया तरीका

( भोपाल से लौटते वक्त ट्रेन में लिखा था )

चलो छोड़ो ज़िन्दगी जीने का
नया तरीका सोच लिया हमने
पुराने तरीके चूकगए तो
क्या गम है ।

शुक्रवार, 2 जनवरी 2009

कुल्लू में कविता पाठ

बीते सालकी कुछ यादगार घटनाओ में मेरा कुल्लू जानाऔर वहा का कविता पाठ था। इस के अलावा मै पहली बार ब्लॉग्गिंग से जुड़ी।

बुधवार, 31 दिसंबर 2008

तबले का जादूगर

पुन्दारिक भगवत जी से मेरी मुलाकात तानसेन संगीत समारोह -२००८ में हुई थी .पुन्दारिक जी के तबले ने अपना जो जादू मुझ पर डाला था वो अभी तक बरक़रार है.न, धिन,धिना का लगातार वादन वो जो करते है वो संगीत का समां बाँध देता है.तबले पे उनके हाथ की धाप से जो आवाज़ निकलती है वो ही यह बतला देती है की वो अपनी कला में कितने पारंगत है। banaras gharana के kalakar pundarik जी शिव की नगरी varanasi me रहते है.

वाइस प्रेजिडेंट जी के निवास पर महिला पत्रकारों का दल

ये हम महिला मण्डली पत्रकारों की वाइस प्रेजिडेंट अंसारी जी से मिलने उनके निवास पर गयी थी दिसम्बर की ठंडी में .वाइस प्रेजिडेंट जी को किताबे पढ़ना बहुत पसंद है खास कर के राजनीती की और सुबह की सैर ।

सोमवार, 15 दिसंबर 2008

ताज के साथ कुछ गुफ्तगू

तानसेन समारोह के लिए ग्वालियर जन पड़ा.उसी सिलसिले में ताज हेरिटेज में रुकना हुआ.१२० साल पुराना महल जिसे सिधिया परिवार ने बनवाया था इंग्लैंड के राजा- रानी के स्वागत के लिए।
सब से सुंदर मुझे वह जो लगा वो था दरवाजे पर लटका पुराना ताला और दरवाजे का हेन्डल उसे देख कर मुझे मेरी दादी की अलमारी और उनके दरवाजे का टला याद आ रहा था । दादी बहु शक्त थी अपने अलमारी और कमरे को ले कर . अब तो वैसे ताले और हान्डेल नही देखने को मिले गे। ताज हेरिटेज में अब सिक्यूरिटी बहुत बढ़ा दी गयी है आतकवाद के मद्दे नजर.पूरे परिसर में एक मन्दिर है ,एक तीन शंकर जी का लिंग है जिसकी पूजा होटल के कर्मचारी करते है.एक सुंदर सा पूल है तैरने के लिए.उस पूल के बगल में दो शेर लेते हुए है। जिसे देखना बहुत सकूँ देता है।एक झूला भी है मैदान में। जिसे मैंने बाद में देखा। मुझे दोल्कन सारा ताज घुमाने अन्तिम दिन लगाई थी। दोल्कन मणिपुर से है। बहुत प्यारी सी.अब नॉर्थ-ईस्ट वाले सिर्फ़ नॉर्थ-ईस्ट में नही रह गए है वो अब मुख्य धारा में शामिल हो गए है।