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सोमवार, 31 दिसंबर 2012

लड़ो की तुमको लड़ना है लड़ कर जीने का हक हासिल करना है . ये दुनिया जो तुमेह गर्भ से इस दुनिया में आने के लिए प्रतिबंधित करती है आने के बाद हर पल तुमसे तुम्हारे लड़की होने का हिसाब मांगती है। हिसाब देते -देते तुम्हारी जबान भले ही थक जाये , पर उनके प्रश्न नहीं रूकते . आओ इन प्रश्नों को बदल दे , इन प्रश्न करनेवालों को बदल दे . आओ लड़े कि तुमेह जीने का हक हासिल करना है अपने लिए अपने सुंदर कल के लिए। माधवी श्री 29/12/12

सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

चेहरा

इन चेहरों की भीड़ में अपने चेहरे की तलाश है मुझे
पता नहीं यही तो उतर कर रखा था कल टेबल पर
अपना चेहरा धोने के बाद साबुन से , नहीं फेसवाश से.
हडबड में गलती से किसी और का चेहरे को ओढ़ लिया था मैंने.
तब से अपना चेहरा ढूंढ़ रही हूँ मैं
इन चेहरों की भीड़ में !
(बहुत दिनों बाद आज लिखी एक कविता)

शनिवार, 8 जनवरी 2011

मै जो भी हूँ

मै जो भी हूँ
मुझे बनाया मेरे जनून ने .
मेरे रास्तो को मुश्किलों से
भरने वालो ने !
मुझ पर वार करने वालो ने .
मुझे मेरी मंजिल की कीमत समझाई
मेरे मंजिलो पर रोड़ा
अटकानेवालो ने .

मंगलवार, 4 जनवरी 2011

व्यवस्था

व्यवस्था के दरवाजे पर पंहुचा एक आदमी
जो था व्यवस्था का शिकार -
व्यवस्थापक बन कर.
कुछ दिनों बाद खबर आई
वो आदमी व्यवस्था का शातिर शिकारी बन गया

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

मैं

मैं , मेरे अन्दर मेरी माँ
मेरे अन्दर मेरी बेटी
मैं जीवन जीती -
भूत ,भविष्य , वर्त्तमान .
किसके लिए ?
अपने लिए , माँ के लिए
या बेटी के लिए ?
(पटना की सडको पर माँ को मिस करते हुए... उनको समर्पित )

बुधवार, 22 सितंबर 2010

शब्द और संबाद

तुम कुछ बोलते हो
तुम्हारी आंखे कुछ और
मै कुछ बोलती हूँ
मेरा मन कुछ और
शब्द है, पर संबाद नहीं

जिंदगी और हम

हारना हमने सीखा नहीं
जीतने का मौका जिंदगी ने दिया नहीं
कुछ कमी रह गयी थी आपसी समझ में
तभी तो हर मोड़ चौराहा सा नज़र आता है

सोमवार, 30 नवंबर 2009

वो लड़का

वो लड़का , जिसकी अब सगाई हो चुकी है
वो पूरी कोशिश करता है कि
अपनी होने वाली बीबी के सामने वो
खुद को साबित करसके कि
वो सिर्फ उसका है.
जबकि ,वो लड़का अच्छी तरह से जनता है कि
वो अपनी बीबी का तो क्या
वो खुद का भी नहीं है.
वो अच्छी तरह जनता है कि
वक्त आने पर अपने फायदे के लिए
वो खुद भी धोखा दे सकता है.

वो लड़का पूरी कोशिश करता है कि
अपनी शादी में वो उन लडकियो को न बुलाये
जिनके साथ वो घूमा - फिर करता था.
क्यों कि बाहर घुमने वाली लडकिया
भांड हुआ करती है
जिसमे चाय पी कर फेक दिया जाता है
बोन - चाइना की कप प्लेट नहीं
जिसमे चाय पी कर वापस उसे धो कर
शो केस में सजा कर रख दिया जाये
दूबारा इस्तेमाल के लिए.

माधवी श्री

मंगलवार, 3 नवंबर 2009

पुरुष

पुरुष मेरा मन करता है
तुम्हारा एक ब्रश बनाऊ
उससे अपने कमरे को बुहरू ,
अपने गंदे कपड़ो को साफ़ करू ,
दांत ब्रश करू , कोटे साफ करू ,
बालो पर ब्रश करू
और फिर उसे उठा कर अलमारी में रख दू........

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2009

पुरुष

पुरुष तुम समझते हो कि औरतो में सारे गुण
केवल तुम भरते हो .
अगर तुमेह ऐसा लगता है तो एक काम करो
रेड एरिया से एक देह उठा लाओ
और भर दो उसमे सारे गुण .
नहीं ? नहीं कर सकते ?
ओह, मै तो भूल गयी
तुम ही तो जाते हो वहां अपना बोझ हल्का करने.

बुधवार, 21 अक्टूबर 2009

एक कविता

हर हिन्दू के अन्दर एक हिन्दू है
हर मुस्लमान के अन्दर एक मुसलमान
पर हर इन्सान के अन्दर एक इन्सान क्यों नहीं

शनिवार, 26 सितंबर 2009

ज़िन्दगी और हम

हारना हमने सीखा नहीं , जीतने का मौका जिंदगी ने दिया नहीं
कुछ कमी रह गयी थी आपसी समझ में,
तभी तो हर मोड़ चौराहा सा नज़र आता है.

सोमवार, 7 सितंबर 2009

जूनियर अफसर

जूनियर अफसर ने सीनियर अफसर से कहा -
" सर , आप ने मगवाई है चाय तो पी ही लेता हूँ ,
क्योकि सवाल नौकरी, एसीआर का है
कही चली न जाये कुर्सी "

फिर थोडा रुक कर उसने कहा -
"सर , कुर्सी तो कही नहीं जाती हम ही चले जाते है
तबादले पर "

शुक्रवार, 4 सितंबर 2009

एक कविता- व्यवस्था

व्यवस्था के दरवाजे पर पंहुचा एक आदमी.
जो था व्यवस्ता का शिकार .
कुछ दिनों बाद खबर आयी
वो आदमी ,
व्यवस्था का
शातिर शिकारी बन गया

शनिवार, 31 मई 2008

MAIN

MAIN

MAIN , MERE ANDAR MERI MAA
MERE ANDAR MERI BETI.
MAIN JIVAN JITI-BHOOT,
BHAVISHYA , VARTAMAN .
KISKE LIYE
APNE LIYE, MAA KE LIYE
YA BETI KE LIYE?