बुधवार, 25 नवंबर 2009

POLICE & NEW MEDIA

बदलते समय के साथ नई युवा पीढी भी बदल रही है . समाज भी बदल रहा है और समाज के हर हिस्से को छुनेवाला पुलिस विभाग . ऑरकुट और फेसबुक जैसे सामाजिक साईट पर कई पुलिस वाले दिखने लगे है अपने विचारो और तस्वीरो के साथ. कुछ ने तो इसे अपने जीवन में आरहे बदलाव का माध्यम बनाया है ,कुछ अपनी ट्रेनिंग में आ रहे पलो को दोस्तों -जनता के साथ बटना चाहते है. इसमें नवनीत सिकेरा का ऑरकुट प्रोफाइल बहुत हद तक सामाजिक और थोड़े उनके निजी पलो से आम जनता को अवगत करवाता है. एनकाउंटर स्पेसिअलिस्ट नवनीत ने तो ब्लॉग की दुनिया में भी कदम रख दिया है . यह अपने कामो को जनता के बीच में ले जाने का एक बेहतर माध्यम है इन अधिकारियो के लिए जो प्राय राजनेताओ की तरह आम जनता के दरबार में नहीं जाते . पर सभी नवनीत की तरह परिपक्व अधिकारी नहीं है. कुछ नए पुलिस अफसरों का प्रोफाइल पढ़ कर तो लगेगा ही नहीं कि किसी आईपीएस श्रेणी के अधिकारी का प्रोफाइल आप पढ़ रहे है , विशेष करके जब वे पब्लिकली ये दावा करे कि वे दोस्ती, नेट्वर्किंग के साथ- साथ महिलाओ के साथ डेटिंग के लिए ऑरकुट पर है और उनकी पसंदीदा फिल्मे कुछ संजीदा फिल्मो के साथ कुछ इस प्रकार से है -अँधेरी रात में दिया तेरे हाथ में, जंगल में मंगल, कम्सिनो का कातिल, हुस्न के लुटेरे, प्यासे शैतान, गुलाबी राते, तनहा जवानी जैसी फिल्मो हो तो आम जनता को सोचना पड़ जाये गा कि किस तरह के अफसर रास्ट्रीय पुलिस अकेडमी हमे तैयार कर के दे रहा है. और अगर उक्त व्यक्ति यह भी कहे कि रात में सोने से जाने के पहले "फ टीवी" यानि फैशन टीवी देखना उसे पसंद हो तो थोडी चिंता होना लाजमी हो जाती है . अगर इस तरह के मानसिकता के अधिकारी के पास कोई महिला पीडिता जायेगी तो उसके साथ कैसा व्यहवार होगा ये कल्पना के दायरे के बाहर है. और वो किस तरह से अपने से नीचे महिला अधिकारियो के साथ पेश आयेगे ये भी चिंता का विषय है.
कुछ युवा अधिकारी अपने कठिन ट्रेनिंग के क्षणों को भी बाटते दिखे है , इनमे महिलाओ को पुरुष अधिकारियो के साथ कंधे - से - कन्धा मिलाकर कठिन ट्रेनिंग लेते देखना यादगार क्षणों में है.
फेस बुक में भी आपको एक महिला पुलिस अधिकारी दिख जाये गी पर अपनी कविताओ , तस्वीरो और व्यक्तिगत चर्चो के कारण ,इनमे कही भी वे स्त्री मुद्दों पर चर्चा करती हुई नहीं दिखी है. न ही पुलिस में स्त्रीओ की इस्थिति पर कुछ कहते या जनता को अपनी कथ्नियो से अवगत करते हुए नज़र आयी है. दुःख की बात है कि इस सोशल साईट का उपयोग अभी तक आम जनता को कई मुद्दों पर जागृत करने के लिए किया जासकता है , पर किया नहीं जा रहा है. कुछ युवा अधिकारियो का साहितिक लगाव भी उनकी कम्युनिटी देख कर पता चल जारहा है और उनकी संजीदगी का भी अंदाजा लगाया जा सकता है जैसे "अल्लामा मुहम्मद इकबाल ", लव -ट्रुए(true divinity), , उर्दू पोएट्री, अहमद फ़राज़, परवीन शाकिर , दीवाने ग़ालिब, बैच मेट की कम्युनिटी ,.कुछ अधिकारियो का पञ्च लाइन उनके जज्बे के बारे में बतलाता है जैसे " फलक को जिद है जहाँ बिजलिया गिराने की , हमे जिद है वहां एशिया बनाने की ." इनमे महिला अधिकारी अपने आपको पूरी तरह से सिमित रखी है. उनका प्रोफाइल सिर्फ उनकी उपस्थिति दर्ज करवा रहा है. कुछ सन्देश या संबाद बटता नहीं दिख रहा है.

कुछ आम जनता ने अपने पसंदीदा अधिकारियो के फेन क्लब बना लिए है, कुछ ने आने वाले सिविल अधिकारियो की कम्युनिटी बना ली है ताकि वे एक दूसरे का उत्साह बर्धन कर सके . कुछ पुलिस वालो का उत्साह वर्धन करने के भी कम्युनिटी बनी हुई है. आनेवाले दिनों में पुलिस अधिकारी किसतरह से इन सामाजिक साईट का उपयोग केवल अपनी तस्वीरो दर्शन से निकल कर जनता को कानून की पेचिदिगियो , कम्युनिटी पोलिसिंग को समझाने के लिए, जनता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के लिए , अपने मुश्किलात बटने और मुशीबत साँझा करने , नेताओ के दबाब से खुद को अलग करने , अपनी बेहतर सेवा और अपने अधिकारों की लडाई के लिए करते है ये तो वक़्त ही बताए गा. दूसरी ओर जनता उनके पास जा कर केवल वाह-वाही करने के अलावा कितनी उनसे जानकारिया प्राप्त करने के लिए , अपने अधिकारों की जानकारी के लिए ,समाज सेवा के लिए इस संपर्क का उपयोग करती है यह तो आनेवाला वक़्त ही बताये गा.
एक और याहू ग्रुप है "इंडियन टॉप कॉप" का जिसमे आईपीएस श्रेणी के अधिकारी के अपने विचार और विभिन्न जानकारिया आपस में बाटते है पर यह केवल उनके लिए है बाहर वालो के लिए नहीं. पर इनमे पोस्ट किये गए स्लाइड , मेसेज , परिचर्चा कभी ज्ञान्बर्धक और हास्यप्रद भी होती है.


माधवी श्री

2 टिप्‍पणियां:

rajiv ने कहा…

IAS ho ya IPS, orkut per ho ya facebook per, aksar ham uske expressions ko uske profile ya cadre ki kasuti per rakh kar parakhne lagate hain. Khaki vaerdi vala har koi Kameena nahi hota aur sadhu veshdhari har koi sajjan nahi hota. is hamam me kuch nage hai aur kuch amdhari. yahi hai social sites ka sach

imnindian ने कहा…

मै आप की बात से सहमत हूँ , पर जब आप पर जिम्मेदारिया बढ़ जाये तो आप को उनके अनुसार व्यहवार करना चाहिए. स्कूल में PRIMERY और क्लास १० के बच्चो, दोनों से आप एक जैसी उम्मीद नहीं करते है. जब आप को आपके पद के कारण कोई सम्मान मिल रहा है तो आपको उसकी गरिमा भी रखनी चाहिए .